अराध्या प्रकाशन मेरठ
मेरठ। श्रीराम भवन लालकुर्ती में अराध्या प्रकाशन और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाते हुए तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उमेश पंडित विशिष्ट अतिथि लता बंसल, ममता मित्तल, राजगोपाल कात्यायन, अनिरूद्ध गोयल, डा. जयभगवान सिंह, सुरेश छाबडा एवं दीपक शर्मा ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित व माल्यर्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की। सभी अतिथियों ने जगदीश प्रसाद की पुुस्तक सामाजिक चेतना, डा. अरविंद नादां की पुस्तक ख्वाबों की फेहरिस्त व राम अवतार त्यागी की पुस्तक बदलता परिवेश का सामूहिक रूप से विमोचन किया। कवि जगदीश प्रसाद ने बताया कि उनके काव्य संग्रह सामाजिक चेतना में कविताओं के माध्यम से समाज को जाग्रत करने का कार्य किया है उन्होंने समाज में फैली विसंगतियों को दूर करने का प्रयास भी अपनी कविताओं में किया है। कवि राम अवतार त्यागी ने बताया कि उनकी पुस्तक बदलता परिवेश में उन्होंने हो रहे सामाजिक बदलाव, पश्चिमीकरण और आधुनिकता की अंधी दौड जैसे तमाम पहलुओं पर अपनी लेखनी चलाकर समाज को जाग्रत करने का प्रयास किया है। डा.अरविंद नादां ने बताया कि उन्होंने अपना गजल संग्रह ख्वाबों की फेहरिस्त में महबूबा से बातचीत, नाज नखरे और प्यार मौहब्बत पर अपनी लेखनी चलायी है। कार्यक्रम के दूसरे चरण में श्रीकृष्ण पर कवि सम्मेलन की शुरूआत रचना वानिया ने सरस्वती वंदना से की। कवि सुदेश दिव्य ने कुछ इस प्रकार श्री कृष्ण पर कविता पाठ किया— चरणों में तेरे किया खुद को अर्पण, श्रीकृष्ण वंदन, श्रीकृष्ण वंदन। गीत सुनाकर माहौल को कृष्णमय बना दिया। कवि विनेश कौशिक ने सुनाया— तेरी क्या महिमा कहूं, जग के पालनहार, तेरे दम पर चल रहा ये सारा संसार। कवि सुनील शर्मा ने सुनाया— तेरे जैसा दूसरा देखा न कोई और, तुझको क्या अर्पण करूं मेरे नंदकिशोर। कवयत्री नीलम मिश्रा" तरंग" ने कहा— कृष्ण दिखें जब नयनन को, चैन बड़ा हमको मिल जाता। रोज प्रयास किए हम मोहन, लेकिन तू मिलने नहीं आता। कार्यक्रम में रेखा गिरीश, बीना मंगल, डा. शोभा रतूडी, अरूणा पंवार, कविता कुसुमाकर, माला सिंह, स्वाति सिंह, स्वाति भाटिया, बीना मंगल, चित्रा त्यागी अलका गुप्ता उषा भिडवारिया, मंगल सिंह मंगल, नरेन्द्र त्यागी, मनमोहन भल्ला, चन्द्रशेखर मयूर, डोरी लाल भास्कर आदि ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डा. सुदेश दिव्य ने किया। कार्यक्रम में सुरेश छाबडा, श्रीराम भटट, विनेश कौशिक, विक्रम सिंह, लता बंसल, डा. सुनील शर्मा आदि का सहयोग रहा।